अध्यात्म का अनुसरण करना अपने मन की भावना का अनुसरण करना है, जिसके परिवेश में आप पले-बढ़े हैं। अध्यात्म- यह मन का एक अटल विश्वाश है जो जोश से परिपूर्ण है। वास्तव में अध्यात्म का एक आस्तित्व भी है और कोई अस्तित्व भी नहीं। यह एक मानसिक आवेग है, प्रयास है; अपने मस्तिष्क में बनी अपने अराध्य की क्षवि को ढूढ़ने का और उसके कहीं आगे जाकर अनंत को जानने का।
आज मैं आपको घुमाने के लिये लेकर चलता हूँ हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल और आराध्य प्रभु श्रीराम के कर्मक्षेत्र - चित्रकूट धाम। भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक चित्रकूट मनोहारी विंध्य पर्वतमाला से घिरा हुआ तथा मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। ऐसी जनश्रुति है कि भगवान श्री राम ने माता सीता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के चौदह वर्षो में ग्यारह वर्ष चित्रकूट में ही बिताये थे। इसी स्थान पर ऋषि अत्रि और सती अनसुईया ने भी ध्यान लगाया था। यह वही स्थान है जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी को माता अनुसईया ने छः - छः महीने का अबोध बालक बना दिया था। खैर पौराणिक कथाओं से आगे चलते हैं ...
चित्रकूट में घूमने वाले स्थान :
1- रामघाट: राम घाट वह घाट है जहाँ प्रभु राम नित्य स्नान किया करते थे l इसी घाट पर राम-भरत मिलाप मंदिर है और इसी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा भी है l जिस पर अंकित है - "चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर"। मान्यता है कि बाबा तुलसी को प्रभु श्री राम ने यहीं दर्शन दिया था।
2- कामदगिरि पर्वत - कामतानाथ स्वामी: इस पवित्र पर्वत का काफी धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु इस पर्वत की 5 किलोमीटर की परिक्रमा कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। इस पर्वत के रास्ते में लक्ष्मण पहाड़ी (जहाँ से लक्ष्मण जी रात्रि में पहरा देते थे) पड़ती है। उसी के समीप खोही है जहाँ पर गुलाब जामुन खाना कतई न भूलें। पूरी परिक्रमा में आपको साथ देने के लिये भरी संख्या में वानर मिलेंगे।
3- हनुमान धारा: पहाड़ी के शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है। मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है। कहा जाता है कि यह धारा श्रीराम ने लंका दहन से आए हनुमान के आराम के लिए बनवाई थी। पहाड़ी के शिखर पर ही 'सीता रसोई' है। यहां से चित्रकूट का सुन्दर दृष्य देखा जा सकता है।
4 - गुप्त गोदावरी: यह अपनी गुफाओं के लिए प्रसिद्द है। यह मुख्य नगर से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। यहां दो गुफाएं हैं। एक गुफा चौड़ी और ऊंची है। प्रवेश द्वार संकरा होने के कारण इसमें आसानी से नहीं घुसा जा सकता। गुफा के अंत में एक छोटा तालाब है जिसे गोदावरी नदी कहा जाता है। दूसरी गुफा लंबी और संकरी है जिससे हमेशा पानी बहता रहता है। कहा जाता है कि इस गुफा के अंत में राम और लक्ष्मण ने दरबार लगाया था।
5: राम दरबार : गुप्त गोदावरी वाले रास्ते में ही ग्रामोदय विश्विद्यालय के सामने राम दरबार है। यह कोई मंदिर नहीं अपितु राष्ट्रऋषि की उपाधि से विख्यात श्री नाना जी देशमुख जी की प्रेरणा से राम जी की जीवनी को अनुपम कलाकृतियों से दर्शाया गया है।
इन सबके अतिरक्त आप सती अनसुईया, जानकी कुंड और स्फटिक शिला भी घूम सकते हैं...
कैसे जायें? - चित्रकूट रेल और सड़क मार्ग से सुचारू रूप से जुड़ा हुआ है। नजदीकी रेलवे स्टेशन कर्वी है (स्टेशन कोड CKTD) जो दिल्ली, इलाहबाद, सतना रुट से जुड़ा है। सड़क मार्ग इलाहाबाद, बांदा, झाँसी, कानपुर जुड़ा है जहाँ से नियमित बस सेवाएं हैं। दिल्ली से भी चित्रकूट के लिए बस सेवा उपलब्ध है।
कहाँ रुकें ? - चित्रकूट में रुकने के लिये आरोग्यधाम का पंचवटी होटल, सद्गुरु साईं ट्रस्ट का जानकी कुंड की धर्मशाला और सबसे उत्तम राजस्थानी शैली में बना "श्रीधर धाम" होटल।
श्रीधर होटल कांटेक्ट +918827713941
रेट - 500, 700, 1000। कूलर - एसी रूम।
खाना कहाँ खायें? - अगर आप श्रीधर धाम में रुक रहें हैं तो वहां की कैंटीन में खाना खायें वहां 120 रूपये की थाली है, और अगर आप शाम को रामघाट के किनारे आरती देखने का मन बनायें हैं या वहीं कुछ देर एकांत में बैठकर आनन्द लेना चाहते हैं तो उसके समीप ही अन्नपूर्णा भोजनालय है - जहाँ प्रति थाली 100 रूपये (आप कितना भी खायें) खाना स्वाद से भरपूर मिलेगा।
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अभी के इतना ही... चित्रकूट में अभी आगे और घूमेंगे... इस पेज की पहली पोस्ट कामतानाथ और चित्रकूट को समर्पित करते हुये रात्रि की विदा लेता हूँ। आशा करता हूँ यात्रा कराने का यह पहला प्रयास सफल रहा होगा। राम -राम।
सचिन तिवारी।
आज मैं आपको घुमाने के लिये लेकर चलता हूँ हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल और आराध्य प्रभु श्रीराम के कर्मक्षेत्र - चित्रकूट धाम। भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में से एक चित्रकूट मनोहारी विंध्य पर्वतमाला से घिरा हुआ तथा मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। ऐसी जनश्रुति है कि भगवान श्री राम ने माता सीता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के चौदह वर्षो में ग्यारह वर्ष चित्रकूट में ही बिताये थे। इसी स्थान पर ऋषि अत्रि और सती अनसुईया ने भी ध्यान लगाया था। यह वही स्थान है जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी को माता अनुसईया ने छः - छः महीने का अबोध बालक बना दिया था। खैर पौराणिक कथाओं से आगे चलते हैं ...
चित्रकूट में घूमने वाले स्थान :
1- रामघाट: राम घाट वह घाट है जहाँ प्रभु राम नित्य स्नान किया करते थे l इसी घाट पर राम-भरत मिलाप मंदिर है और इसी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा भी है l जिस पर अंकित है - "चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक करे रघुवीर"। मान्यता है कि बाबा तुलसी को प्रभु श्री राम ने यहीं दर्शन दिया था।
2- कामदगिरि पर्वत - कामतानाथ स्वामी: इस पवित्र पर्वत का काफी धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु इस पर्वत की 5 किलोमीटर की परिक्रमा कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। इस पर्वत के रास्ते में लक्ष्मण पहाड़ी (जहाँ से लक्ष्मण जी रात्रि में पहरा देते थे) पड़ती है। उसी के समीप खोही है जहाँ पर गुलाब जामुन खाना कतई न भूलें। पूरी परिक्रमा में आपको साथ देने के लिये भरी संख्या में वानर मिलेंगे।
3- हनुमान धारा: पहाड़ी के शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है। मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है। कहा जाता है कि यह धारा श्रीराम ने लंका दहन से आए हनुमान के आराम के लिए बनवाई थी। पहाड़ी के शिखर पर ही 'सीता रसोई' है। यहां से चित्रकूट का सुन्दर दृष्य देखा जा सकता है।
4 - गुप्त गोदावरी: यह अपनी गुफाओं के लिए प्रसिद्द है। यह मुख्य नगर से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। यहां दो गुफाएं हैं। एक गुफा चौड़ी और ऊंची है। प्रवेश द्वार संकरा होने के कारण इसमें आसानी से नहीं घुसा जा सकता। गुफा के अंत में एक छोटा तालाब है जिसे गोदावरी नदी कहा जाता है। दूसरी गुफा लंबी और संकरी है जिससे हमेशा पानी बहता रहता है। कहा जाता है कि इस गुफा के अंत में राम और लक्ष्मण ने दरबार लगाया था।
5: राम दरबार : गुप्त गोदावरी वाले रास्ते में ही ग्रामोदय विश्विद्यालय के सामने राम दरबार है। यह कोई मंदिर नहीं अपितु राष्ट्रऋषि की उपाधि से विख्यात श्री नाना जी देशमुख जी की प्रेरणा से राम जी की जीवनी को अनुपम कलाकृतियों से दर्शाया गया है।
इन सबके अतिरक्त आप सती अनसुईया, जानकी कुंड और स्फटिक शिला भी घूम सकते हैं...
कैसे जायें? - चित्रकूट रेल और सड़क मार्ग से सुचारू रूप से जुड़ा हुआ है। नजदीकी रेलवे स्टेशन कर्वी है (स्टेशन कोड CKTD) जो दिल्ली, इलाहबाद, सतना रुट से जुड़ा है। सड़क मार्ग इलाहाबाद, बांदा, झाँसी, कानपुर जुड़ा है जहाँ से नियमित बस सेवाएं हैं। दिल्ली से भी चित्रकूट के लिए बस सेवा उपलब्ध है।
कहाँ रुकें ? - चित्रकूट में रुकने के लिये आरोग्यधाम का पंचवटी होटल, सद्गुरु साईं ट्रस्ट का जानकी कुंड की धर्मशाला और सबसे उत्तम राजस्थानी शैली में बना "श्रीधर धाम" होटल।
श्रीधर होटल कांटेक्ट +918827713941
रेट - 500, 700, 1000। कूलर - एसी रूम।
खाना कहाँ खायें? - अगर आप श्रीधर धाम में रुक रहें हैं तो वहां की कैंटीन में खाना खायें वहां 120 रूपये की थाली है, और अगर आप शाम को रामघाट के किनारे आरती देखने का मन बनायें हैं या वहीं कुछ देर एकांत में बैठकर आनन्द लेना चाहते हैं तो उसके समीप ही अन्नपूर्णा भोजनालय है - जहाँ प्रति थाली 100 रूपये (आप कितना भी खायें) खाना स्वाद से भरपूर मिलेगा।
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अभी के इतना ही... चित्रकूट में अभी आगे और घूमेंगे... इस पेज की पहली पोस्ट कामतानाथ और चित्रकूट को समर्पित करते हुये रात्रि की विदा लेता हूँ। आशा करता हूँ यात्रा कराने का यह पहला प्रयास सफल रहा होगा। राम -राम।
सचिन तिवारी।






